महानदी जल विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ी पहल ओडिशा के प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ सहमत  

महानदी जल विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ी पहल ओडिशा के प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ सहमत   

सतीश मिश्रा (उप संपादक) 

महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने ओडिशा के उस प्रस्ताव पर सहमति जताई है, जिसमें केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की मध्यस्थता में बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की बात कही गई थी।महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (एमडब्ल्यूडीटी) में शनिवार (11 जुलाई) को हुई सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ ने कहा कि वह सीडब्ल्यूसी की मध्यस्थता में सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशने को तैयार है। ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने बताया कि न्यायाधिकरण ने छत्तीसगढ़ सरकार को 23 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपना रुख लिखित रूप में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यह प्रस्ताव सबसे पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखे पत्र में रखा था। उन्होंने लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बजाय दोनों राज्यों के लोगों के हित में आपसी वार्ता से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया था। माझी ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल को भी पत्र लिखकर केंद्र से मध्यस्थता कराने का आग्रह किया था।

मुख्यमंत्री ने अपने प्रस्ताव में जल शक्ति मंत्रालय के मार्गदर्शन में केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित करने का सुझाव दिया था, ताकि नियमित संवाद के माध्यम से सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जा सके।उल्लेखनीय है कि महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन वर्ष 2018 में किया गया था। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने महानदी के ऊपरी हिस्से में कई बैराज और बांध बनाकर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया, जिससे विशेषकर गर्मियों में ओडिशा में जल उपलब्धता प्रभावित हुई।महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने छत्तीसगढ़ की सहमति का स्वागत करते हुए इसे विवाद के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई से पहले छत्तीसगढ़ अपनी लिखित सहमति न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

महानदी जल बंटवारे के मुद्दे पर दोनों राज्यों के कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों ने 16 से 26 जून तक नई दिल्ली में कई दौर की बैठकें कीं। इन बैठकों की रिपोर्ट 27 जून को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण को सौंपी गई। आचार्य ने कहा, "इन बैठकों ने 11 जुलाई को न्यायाधिकरण के समक्ष बनी सहमति की आधारशिला तैयार की।"गौरतलब है कि पिछले आठ वर्षों में दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच इस विवाद के समाधान के लिए लगभग 50 तकनीकी और प्रशासनिक बैठकें हो चुकी हैं। अब सीडब्ल्यूसी की मध्यस्थता में वार्ता की संभावना बनने से लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।