भूमिगत कोयला खदानों में रेत भरने का काम जारी
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
तालचेर के भूमिगत कोयला खदानो से कोयला निकालने के बाद उसे यूँ ही छोड़ देने से या आवश्यकता अनुसार बालू ना भरने से भू धसान का खतरा बना रहता है। इस आशंका को जाहिर करते हुए स्थानीय जनता और नेताओ ने भी एमसीएल पर प्रश्न उठाया था। इस खबर को मीडिया में प्रकाशित की गई थी।
मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद एमसीएल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि तलचेर क्षेत्र में भूमिगत कोयला खदान से कोयला उठाने के बाद बालू भरने का काम जारी है। एमसीएल ने कहा है कि 19 जुलाई 2006 से देउलबेड़ा भूमिगत कोयला खदान में कोयला उठाने का काम बंद है, लेकिन खान सुरक्षा महानिदेशालय के निर्देशानुसार खान में उस साल से पानी और बालू भरने का काम जारी है. खदान के मुख्य द्वारा बंद होने के कारण ऊपर से हाइड्रो प्रिमिटिव विधि से बालू भराई का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य में समय लगने वाला बताया गया है। तालचेर के मंडपपाल बालू घाट से हाइवा और मशीनों से बालू लाकर खदान में भरा जा रहा है। चाडियाकुटा में पिछले साल से रेत भराई का काम शुरू हो गया है। इस वर्ष सूर्यनगर में एक नया स्थिरीकरण स्थल चलाने के लिए खनन उद्योग द्वारा प्रयास जारी हैं। हालांकि कुछ लोगों के विरोध के कारण काम बाधित हो रहा है। इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को लिखित में दे दी गई है। वर्ष 2021-22 में एमसीएल के जनसंपर्क अधिकारी ने प्रेस के माध्यम से जानकारी दी है कि खदान में बालू भराई कार्य में 255 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है.





