बीजद और कांग्रेस ने विधायकों को जारी किया व्हिप

बीजद और कांग्रेस ने विधायकों को जारी किया व्हिप

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

आगामी राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग की आशंका के बीच बीजू जनता दल (बीजद) ने बुधवार ( 11 मार्च) और कांग्रेस ने 12 मार्च को अपने अपने विधायकों को तीन पंक्ति व्हिप’ जारी किया है और उन्हें 13 से 16 मार्च तक भुवनेश्वर में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।

बीजद पार्टी की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक द्वारा जारी नोट में कहा गया है, “बीजू जनता दल के सभी विधायकों को सूचित किया जाता है कि राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान सोमवार, 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक ओडिशा विधानसभा परिसर में होगा। सभी विधायकों को निर्देश दिया जाता है कि वे मुख्यालय नहीं छोड़ें और 13 से 16 मार्च तक अनिवार्य रूप से भुवनेश्वर में उपस्थित रहें। इसे थ्री-लाइन व्हिप माना जाए और इसका कड़ाई से पालन किया जाए।”
उसी प्रकार कांग्रेस पार्टी के व्हिप सी एस राजन एक्का द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि कांग्रेस विधायक दल के सभी विधायक 13 से 16 मार्च तक अनिवार्य रूप से भुवनेश्वर में मौजूद रहें और मुख्यालय न छोड़ें।
राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों की अनुपस्थिति या दल-बदल की आशंका को देखते हुए दोनों दलों ने यह कदम उठाया  है। ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होना है। 

बीजद ने यह कदम हाल ही में बालासोर के पूर्व सांसद रवींद्र कुमार जेना के दल बदलकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उठाया गया है। चौथी राज्यसभा सीट को लेकर कड़े मुकाबले के  बीच उनके इस कदम से बीजद में चिंता बढ़ गई है। खास बात यह है कि उनकी पत्नी सुभासिनी जेना अभी भी बालासोर जिले के बस्ता से बीजद की विधायक हैं।

विधानसभा में 14 सीटों वाली कांग्रेस और एक माकपा  विधायक मिलकर बीजद के ‘साझा उम्मीदवार’ डॉक्टर दत्तेश्वर होता का समर्थन कर रहे हैं। इस रणनीति के तहत विपक्ष दो सीटें सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है।

2024 के चुनावों के बाद 147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में दलों की मौजूदा ताकत को देखते हुए भाजपा के पास 79 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। ऐसे में भाजपा आसानी से दो सीटें जीत सकती है। पार्टी ने राज्यसभा के लिए प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है।
दो सीटें जीतने के बाद भाजपा के पास 22 अतिरिक्त वोट बचेंगे, जो तीसरी सीट जीतने के लिए जरूरी संख्या से आठ कम हैं। वहीं दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद के पास 48 विधायक हैं, जिससे वह एक सीट जीतने की स्थिति में है। इस सीट के लिए पार्टी ने नवीन पटनायक के राजनीतिक सचिव संत्रुप्त मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है।
बीजद को पहले उम्मीद थी कि प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता ‘साझा उम्मीदवार’ के रूप में कांग्रेस और माकपा के समर्थन से चुनावी मुकाबले में टिक सकते हैं। 
हालांकि, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दिलीप राय के चुनाव मैदान में उतरने और ‘अंतरात्मा की आवाज’ के आधार पर वोट मिलने का दावा करने से बीजद की चिंताएं बढ़ गई हैं। ‘अंतरात्मा की आवाज’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर क्रॉस-वोटिंग को सही ठहराने के लिए किया जाता है।
इस घटनाक्रम ने बीजद के लिए स्थिति को और जटिल बना दिया है, क्योंकि 2024 के चुनावों में हार के बाद से पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है।
कांग्रेस के भीतर भी कुछ नेताओं में असंतोष देखा जा रहा है, खासकर पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम के निष्कासन के बाद उनकी बेटी और कटक बाराबटी की विधायक सोफिया आलम  तथा सानखेमुंडी के विधायक रमेश चंद्र जेना पहले चुनाव रणनीति पर चर्चा के लिए बुलाई गई कांग्रेस विधायक दल की बैठक से अनुपस्थित रहे थे।