बाहरी मजदूरों का बढ़ता वर्चस्व
हर हर शम्भू चौधरी (मुख्य संपादक)
अक्सर यह देखा गया है कि जिस स्थान पर स्थानीय लोग बेरोजगार होते है वही बाहर राज्यों से आए व्यक्तियों के पास काम का अभाव नही होता है। ऐसा क्यों? यह चिंतन का बिषय है। इस बिषय पर चिंतन और शोध किया जाना चाहिए।
अक्सर यह देखा गया है कि स्थानीय लोग जिस काम को करना नही चाहते या उस काम को करने में लापरवाही बरतते है उसी काम को किसे दूसरे राज्य या जिला से आया मजदूर वेहतरीन तरीके से समय पर कर देता है ।
कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है कि जो व्यक्ति अपने गृह शहर, गाँव, जिला, राज्य या देश से बाहर जिस कार्य को कर रहा होता है,उस कार्य में पारंगत होने के बावजूद वही कार्य संकोच वस,बडप्पन या किसी और कारण से अपने गृह क्षेत्र में करना नहीं चाहता।
नतिजा यह होता है कि उस कार्य को पूरा करने के लिए बाहरी कामगारों का सहारा लेना पड़ता है।
ज्यादातर निर्माण क्षेत्र,फास्टफूड़ स्टालो, घरेलू नौकर, शब्जी विक्रेता, फेरी वाले, छोटे दुकानो में काम करनेवाले ज्यादातर लोग आपको बाहरी ही मिलेगें।
जबकि इसी काम को समान वेतन पर करते हुए पडोस का व्यक्ति कही दूर शहर में देखने को मिलेगा। अगर वह व्यक्ति अपने पड़ोस की दुकान में काम करता तो ज्यादा पैसे बचा पाता और अपने घर में परिवार के बीच रहता।
लेकिन विडम्बना यह है कि हम जब अपने पड़ोसी से किसी काम को करवाते है तो असमय और अनावश्यक छुट्टी लेना, मनमाने ढंग से काम करना,उनकी आदत बन जाती है।
निर्माण क्षेत्र में भी समान समस्या का सामना करना पड़ता है। पड़ोस का ठेकेदार हो या मजदूर काम में टालमटोल करे या समय पर कार्य पूरा ना करे तो उसे कुछ कहते नहीं बनता इससे हमारा समय और धन की बर्बादी होती है। कई बार अधूरे कार्य को समय से पूरा करने के लिए दूसरे ठेकेदार को कार्य हस्तांतरित करना पड़ता है। यही वजह है कि हम अपने काम को समय पर करने के लिए ऐसे कामगारों की तलाश करते है जो हमारे कार्य को गुणवत्ता पूरक और समय पर करके दे सके। जिसका लाभ बाहर से आए मजदूर बखूबी उठाने लगे है।
इस बात का फायदा उठाते हुए हमारे देश के कई अंचलो में अवैध तरीके से आए घुसपैठिए जिन्हें रिफ्यूजी भी कहा जाता है, अपनी पांव जमाने लगे है।
यह कहा जाए तो गलत न होगा कि मजदूरी करने में ये पारंगत होते है। घरेलू कार्य हो या निर्माण कार्य ये लोग बहुत अच्छी तरीके से और समय पर या समय से पहले ही पूरा कर देते है जिससे काम कराने वाले का काम तो बेहतरीन होता ही है साथ ही पैसा और समय की भी बचत होती है। और अपने कार्य में अच्छे प्रदर्शन की वजह से यह बाजार में अपनी पैठ बनाते जा रहे है। और समय के साथ ये लोग आहिस्ते आहिस्ते अपना कार्यक्षेत्र और जनसंख्या में बढोत्तरी कर रहे है। इनका विरोध तब होता है जब इनकी बढ़ती हुई जनसंख्या और कार्यकलापो से हमें परेशानी होने लगती है। पर तबतक बहुत देर हो चुकी होती है।





