बांग्लादेश के मुद्दे पर चुप क्यों है सेक्युलर पार्टीयाँ - डा.निर्मल
बांग्लादेश में हिंदू दलितों और बौद्धों धार्मिक अल्पसंख्यकों के दमन पर कांग्रेस सपा सहित सेकुलर पार्टियों की खामोशी चिंताजनक -डॉक्टर निर्मल
बस्ती: दिसंबर बांग्लादेश में हिंदू समुदाय का 90% हिस्सा दलित समाज का है जो वर्तमान समय में गंभीर संकट का सामना कर रहा है।विभाजन के समय ये लोग वहीं रहकर खुशहाल जीवन का सपना संजोया था।आज सर्किट हाउस बस्ती में आयोजित प्रेस वार्ता में विधान परिषद सदस्य और अध्यक्ष डॉ आबेडकर महासभा ट्रस्ट डॉक्टर लालजी प्रसाद निर्मल ने इस ज्वलंत मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत पाकिस्तान विभाजन के समय बंगाल के प्रमुख दलित नेता योगेंद्र नाथ मंडल डॉक्टर अंबेडकर के समकालीन थे जो मुस्लिम लीग के प्रभाव में पूर्वी पाकिस्तान चले गए थे वहां वे कानून मंत्री बने लेकिन जल्द ही उन्हें दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों और नरसंहार का सामना करना पड़ा लाखों दलितों की हत्या और महिलाओं के साथ बलात्कार के बाद उनका मोह भंग हो गया अंततः 8 अक्टूबर 1950 को उन्होंने पाकिस्तान से भाग कर भारत की शरण ली और अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
डॉ निर्मल ने बताया कि वर्तमान समय में बांग्लादेश में हिंदू दलित अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है जिस पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की खामोशी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा ये जो भाई चारा बनाने गंगा जमुनी तहजीब की दुहाई देने वाले दल है आज उनके मुंह में दही जम गया है।शोषण अत्याचार और दुर्गति का अगर जीता जागता चित्र कहीं है तो बंग्लादेश में हो रहे क्रूर और जघन्य अपराध को देख लें।मानवता को शर्मशार करती तस्वीरें बहन बेटियों की अस्मिता से हो रहा अपराध क्षमा के योग्य नहीं है।इस घटनाओं को देखकर ऐसा प्रतीत होता है यह सभ्य समाज और मानवता के दुश्मन हैं।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बांग्लादेश के मामले में प्रभावी हस्ताक्षेप की अपील की है साथ ही साथ भारत को बांग्लादेश में हिंदू दलित और बौधो की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क़दम उठाने की मांग की । उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आपातकालीन स्थिति में इन समुदायों को भारत में शरण देने पर विचार भी किया जाना चाहिए साथ ही साथ प्रधानमंत्री से पांच मांग की है। पहले भारत सरकार तत्काल बांग्लादेश से उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता कर हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें दूसरा बांग्लादेश में मानवाधिकार संगठनों को स्वतंत्रता से जांच करने की अनुमति के लिए दबाव डालें तीसरा संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाया जाए और बांग्लादेश को जिम्मेदार ठहराया जाए चौथा भारत हिंदुओं का विशेष रूप से दलित समाज के लिए एक सहयोग मंच का गठन करें ताकि बांग्लादेशी हिंदुओं की मदद के लिए संसाधन जुटाया जा सके पांचवा आपात स्थिति में सीधे भारत सरकार हस्ताछेप कर कार्यवाही करें। अब समय आ गया है जब हम1971वाली गलती को न दोहराएं मित्र देस वहीं है जो मित्रता को कायम रखे।





