बड़गांव समूह स्वास्थ्य केंद्र को मिला आईएसओ का दर्जा
सौ. जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी (सुंदरगढ़)
सुंदरगढ़ जिले के बड़गांव समूह स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को स्वास्थ्य सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आईएसओ-प्रमाणित किया गया है। 14 जुलाई को बड़गांव सीएचसी आईएसओ 9001:2015 को वर्ष 2021 के लिए प्रमाणित किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय सटीकता प्रमाणन प्राधिकरण ने यह मानक प्रदान किया है। यह 2024 तक लागू रहेगा। अब तक बड़गांव सीएचसी समेत जिले के कुल 12 स्वास्थ्य केंद्रों को यह प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र मिल चुका है।
बड़गांव समूह स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परामर्श दिया जा रहा है, जिसमें डायग्नोस्टिक योजना में नि:शुल्क जांच की सुविधा और रिकवरी प्लान में दवाओं का वितरण शामिल है. स्वास्थ्य केंद्र ने बाल एवं मातृ स्वास्थ्य देखभाल, परिवार नियोजन, सुरक्षित प्रसव, संक्रमण और गैर संचारी रोग नियंत्रण, टीकाकरण और योग शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है।
जिला अधिकारी निखिल पवन कल्याण ने कहा कि "जिला प्रशासन सुंदरगढ़ जिले के सभी लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए कदम उठा रहा है।" इस संबंध में, बड़गांव समूह स्वास्थ्य केंद्र गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करके आईएसओ प्रमाणित है। इस अवसर पर मैं जिला स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देता हूं ।
2020 में, राउरकेला के छेंड़ केलानी यूपीएचसी, डीएवीएमसी यूपीएचसी, सेक्टर -4 यूपीएचसी, तिलकानगर यूपीएचसी, बालूघाट यूपीएचसी को आईएसओ का दर्जा दिया गया। इसी तरह, 2021 में बड़गांव के साथ, कुआंरामुंडा सीएचसी, सबडेगा सीएचसी, लेफ्रिपाड़ा ब्लॉक में सेर्गिपल्ली सीएचसी, सुबदेगा ब्लॉक में तंगरगांव पीएचसी, कुतरा ब्लॉक में पुरकापल्ली पीएचसी और राउरकेला में कोयलनगर सीएचसी को आईएसओ का दर्जा मिला।
पिछले कुछ महीनों में सुंदरगढ़ जिला सामान्य अस्पताल को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए वर्ष 2020-21 के लिए 'कायाकल्प' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
सुंदरगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए प्रशासन द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल मिलती है। जिले में शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थागत प्रसव को सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही गंभीर रूप से बीमार मरीजों को घर पहुंचाने के लिए अत्याधुनिक एंबुलेंस व्यवस्था है। दूरदराज के इलाकों में बाइक एंबुलेंस सेवा भी शुरू की गई है।





