फर्जी कागजातों पर नौकरी का गंभीर आरोप और फर्जी जांच रिपोर्ट
सुंदरगढ़: फर्जी कागजातों पर नौकरी का गंभीर आरोप! बिसरा की शिक्षिका इंदु राय पर लटकी तलवार, जिला प्रशासन की कार्यशैली पर उठे बड़े सवालसुंदगढ़
सुंदरगढ़ जिले के बिसरा सरकारी हिंदी उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका इंदु राय की नियुक्ति एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। पुलिस रिकॉर्ड में उनका नाम "इंद्रावती मण्डल" दर्ज होने और फर्जी जांच रिपोर्ट के जरिए मामले को दबाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण ने जिला शिक्षा विभाग (DEO) और प्रखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहचान का बवंडर: शिकायतकर्ता के अनुसार, पुलिस रिकॉर्ड में शिक्षिका इंदु राय का असली नामह इंद्रावती मण्डल दर्ज है। आशंका जताई जा रही है कि कोई अन्य महिला इंदु राय बनकर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल कर रही है। इस गंभीर मामले को लेकर सबसे पहले 25 नवंबर 2025 को बिसरा प्रखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण महीनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय की आस में 12 मई 2026 को सुंदरगढ़ जिला कलेक्टर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई । सिर्फ 3 दिनों में हो गया 'खेला'!
फर्जी जांच रिपोर्ट का पर्दाफाश - शिकायतकर्ताओं को तब तगड़ा झटका लगा जब कलेक्टर के पास शिकायत पहुंचने के महज तीन दिन बाद यानी 14 मई 2026 को इस मामले में कोई सुनवाई किए बिना ही मामले का फर्जी तरीके से निपटारा (क्लोजर) कर दिया गया। जिला सूचना अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में उन मुद्दों पर लीपापोती कर दी गई, जिनका मूल शिकायत (नाम और पहचान की भिन्नता) से दूर-दूर तक कोई लेना-देना ही नहीं था। महज़ औपचारिकता निभाते हुए रिपोर्ट तैयार कर दी गई ताकि आरोपित शिक्षिका और लापरवाह अधिकारियों को बचाया जा सके। आज फिर कलेक्टर की चौखट पर पहुंचा मामला।हार न मानते हुए, आज 6 अक्टूबर 2026 को शिकायतकर्ता ने एक बार फिर सुंदरगढ़ जिला कलेक्टर के समक्ष कड़ा शिकायती पत्र सौंपा है। पत्र में साफ आरोप लगाया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय, सुंदरगढ़ ने मिलीभगत कर फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार की और दोषियों को संरक्षण दिया।
यह पूरा प्रकरण शिक्षा विभाग के भीतर फैले भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुस्ती की पोल खोलता है। अब सबकी निगाहें सुंदरगढ़ के जिला कलेक्टर पर टिकी हैं—क्या वे इस बार निष्पक्ष जांच के आदेश देकर जिला शिक्षा अधिकारी, प्रखण्ड शिक्षा अधिकारी और आरोपित शिक्षिका इंदु राय पर कड़ी कार्रवाई करेंगे, या फिर एक बार फिर फाइलों को बंद कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
बड़ा सवाल: क्या पुलिस रिकॉर्ड और स्कूल के दस्तावेजों की फॉरेंसिक या उच्चस्तरीय जांच करवाकर दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा, या भ्रष्ट तंत्र के आगे न्याय दम तोड़ देगा?
इस खबर पर आगे की अपडेट्स के लिए जुड़े रहें हमारे साथ।





