प्राचीन शिवलिंग की शुध लेनेवाला कोई नही

प्राचीन शिवलिंग की शुध लेनेवाला कोई नही

अनुराग आचार्य (वयौरोचीफ) 

एक समय था कि भारतवर्ष में मंदिरो, शिवालयो की कमी नही थी।
हमारे देश में मंदिरो का प्राचीन इतिहास रहा है। हमारे देश के राजा महाराजा आदि मंदिर निर्माण और रखरखाओ का खाश  ध्यान रखा करते थे।
मुगल शासन में इन मंदिरो का दोहन आरम्भ हुआ,जिससे मंदिरो की संख्या तेजी से कम होती गई। जो मंदिर बच गए उसमें से कुछ ऐसे भी है जो रखरखाओ के अभाव में जिर्णशिर्ण अवस्था में दम तोड़ने पर मजबूर है। 

ऐसी ही एक शिवालय की दास्तान तालचर से सामने आयी है। तालचर के वार्ड नंबर 11 में स्वयं शासित महाविद्यालय के निकट स्थानीय राजा द्वारा स्थापित एक प्राचीन शिवलिंग है, जहाँ मंदिर निर्माण होना था,पर स्थानीय प्रशासन और जनता की उदासीनता से यह हो न सका इसके उलट शिवलिंग के चारोंओर की भूमि लैगो द्वारा कब्जा किए जाने से मंदिर निर्माण में शंका उत्पन्न हो रही है। और प्राचीन शिवलिंग यथास्थान जिर्णशिर्ण अशस्था में पड़ा हुआ है।