प्रदुषण से त्रस्त है तालचर वासी
अनुराग आचार्य (व्यौरो चीफ: अंगुल)
ओडिशा सरकार एक ओर जहाँ मोटरसाइकिल से जरा भी धुआँ निकलता दिख जाए तो जुर्माने के तौर पर ₹500 का चालान काट देती है पर बड़े बड़े कल कारखानो से निकलता धुआँ पर आँख मुंद लेती है।
कुछ ऐसा ही नजारा ओडिशा के अंगुल जिले के तालचर में देखा जा रहा है,जहाँ एमसीएल की कोयला खान से निकलने वाली धूल से होने वाले वायु प्रदूषण पर तालचर वासियों ने प्रश्न उठाया है।
कोयला खान से निकलने वाली कोयला मिश्रित धूल से अंचलवासी काफी परेशान है ,इससे निजात पाने के लिए प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुके हे। पर प्रशासन के कान में जूँ तक नही रेंगी।
ऐसे में सबके जेहन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि अगर एक मोटरसाइकिल से जरा सा धुआँ निकल जाए तो ₹500 का जुर्माना किया जाता है,इसी तरह इतने बड़े कोयला खान से निकलने वाली कोयला मिश्रित धूल से पूरे अंचल का वायूमंडल प्रदूषित हो रहा है इस पर कब जुर्माना लगाया जाएगा।
इस अंचल में कई कोयला खाने है, जिससे निकलने वाली धूल से तालचर का जल, थल, एवं वायुमंडल लागातार प्रदूषित हो रहा है। यह प्रदुषण सीधे तौर पर जनजीवन को प्रभावित कर रहा है।
तालचर के कडिहाँ में हजारो एकड़ में फैली कोयला खानो से मिट्टी में दबे कोयला को निष्कासन के बाद ट्रक, टीपर,हाईवा,ट्रेन,आदि माध्यमो से यहाँ से अन्यत्र ले जाया जाता है,जिससे पूरे रास्ते के आसपास के क्षेत्रो में कोयला मिश्रित धूल उड़कर जनजीवन और बृक्षलताओ,जलि
जलाशयो को भी प्रदूषित कर रही है।
इसके अलावे एनटीपीसी, टीटीपीएस, जिंदल,भूषण,आदि उद्योगो से निकलने वाले अपशिष्ट पाईप या ट्रको,टीपरो के माध्यम से इन कोयला खानो में लाकर गिरा दिया जाता है,जो जल, थल,और वायुमंडल में प्रदुषण का कारण बनता है।
इस प्रदुषण का परिणाम इतना भयावह हो रहा है कि 30 से 40 वर्षो के नौजवान टीवी. ह्रृदयघात, किड़नी रोग, कर्कट रोग, चक्षुरोग व अन्य असाध्य रोग से पीडित हो रहे है।
यहाँ प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि तालचर शहर में एक भयावाह स्थिति तक प्रदुषण पैर पसार चुकि है, ऐसे में राज्य प्रदुषण नियत्रंण बोर्ड क्या कर रही है।





