पर्यावरण की यह कैसी सुरक्षा
भारत में विभिन्न संस्थाओं द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया गया,जिसके तहत विभिन्न स्थानों में लाखों पौधे लगाए गए।
पर पौधे लगाने मात्र से ही पर्यावरण की सुरक्षा हो जायगी क्या? 5 जून को लगाए गए कई पौधे पेड़ का रूप नहीं ले पाएगी। कुछ देखभाल की अभाव में शूख जाएंगी तो कुछ पशुओं का आहार बन जाएगी और कुछ मनचले लोग तोड़कर या उखाड़ कर फेक देंगे।
यह तो सच है कि धरा पर अधिक से अधिक पेडो़ का होना अनिवार्य है। समय समय पर विभिन्न संस्थाओं, वन विभाग आदि की ओर से जगह जगह पौधा रोपण भी किया जाता है। इस पौधो की उचित देखभाल भी होती है, फिरभी पेडो़ की संख्या आवश्यकता अनुरूप नहीं है क्यों? यह चिंता का विषय है।
चिंतन का विषय यह भी है कि क्या केवल पेड़ो के होने से पर्यावरण सुरक्षित हो जाएगी। कल कारखानो, यान वाहनो, विभिन्न धातुओं की खानों, एसी, फ्रीज, रूम हिटर, व अन्य विद्युत चालित उपकरणों की बढ़ती संख्या की वजह से पर्यावरण में बढ़ती गर्मी और वायु प्रदूषण का निदान कैसे हो? चारों ओर बिखरी प्लास्टिक और खेतों में रासायनिक खादो़ की वजह से बंजर होती धरती का निदान कैसे हो?
दिन ब दिन घटता जल स्तर, नदी,तालाब,झरनो,कुओं,समुद्र आदी में प्लास्टिक जैसे मानव निर्मित कृत्रिम बस्तुओं की वजह से फैलता जल प्रदुषण। नदी, झील समुद्र जैसे बड़े जलाशयों में मोटर वोट,जलपोत की वजह से दिन प्रतिदिन फैलता जल प्रदुषण और इसकी वजह से घटते जल प्राणियों की संख्या क्या पर्यावरण का अंग नहीं है।
दिन प्रतिदिन बढ़ते मोबाइल उपभोक्ता और मोबाइल टावरों की बढ़ती संख्या से वातावरण में फैलता विद्युत तरंगों की वजह से मधुमक्खी व अन्य नभचर प्रणियों की घटती संख्या पर्यावरण प्रदूषण का कारण कैसे नहीं है?
क्या उपरोक्त बाते पर्यावरण को क्षति नहीं पहुँचा रही है,ऐसे में केवल चुनिंदा जगहों में पौधा रोपण करके पर्यावरण को सुरक्षित करने का दावा करना पर्यावरण को धोखा देने जैसे है।
पर्यावरण की रक्षा तभी हो पाएगी जब जल, थल और नभ प्रदूषण मुक्त होगा।





