थमता नजर नहीं आ रहा बंडा़मुंडा़ भूमी विवाद

थमता नजर नहीं आ रहा बंडा़मुंडा़ भूमी विवाद
थमता नजर नहीं आ रहा बंडा़मुंडा़ भूमी विवाद

हरहर शम्भू चौधरी (मुख्य संपादक) 

 सुंदरगढ़ जिला के बंडा़मुंडा़ अंचल में रेलवे और स्थानीय लोगों के बीच भूमि विवाद को लेकर छिड़ी जंग थमता नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय लोगों ने पुख्ता प्रमाण के साथ रेलवे पर बार बार यह आरोप लगाया जा रहा है कि उनकी जमीन पर रेलवे विभाग द्वारा बलपूर्वक निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। 

इसी क्रम में बीते कल सोमवार को महेश्वर तांति और पूर्व विधायक जर्ज तिर्की की अगुवाई में हजारों लोग उप जिलाधिकारी को रेलवे द्वारा सशस्त्र पुलिस बल का प्रयोग कर बलपूर्वक चौथे रेलपटरी का कार्य कराए जाने संबंधित एक शिकायत पत्र शौप कर तत्काल कार्य बंद कराए जाने की मांग की। और विरोध प्रदर्शन किया। 

इस विरोध प्रदर्शन को आमा टीवी ने भी अपने कैमरे में कैद किया है। आमा टीवी द्वारा प्रकाशित की गई खबर की विडियो नीचे दी गई है। 

बंडामुंडा़ के प्रभावित लोगों द्वारा उपजिलाधिकारी को दी गई ज्ञापन में निम्न बाते उल्लिखित की गई है -

यह भूमि अधिग्रहण पूर्ववर्ती हिंदुस्तान स्टील प्राइवेट लिमिटेड अब सेल की स्थापना के लिए पुनर्वास और पुनर्वास प्रक्रिया से संबंधित है। आरएसपी और मार्शलिंग यार्ड, बोंडामुंडा 1954 से सवालों के घेरे में है और अभी तक प्रभावित जनजातियों/प्रवासियों को उचित मुआवजा या पुनर्वास नहीं किया गया है।

यह भी पता चला है कि उड़ीसा सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाएँ भारत के संविधान की भावना के अनुरूप नहीं थीं। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 और उड़ीसा अधिनियम 18, 1948 के तहत जारी अधिसूचनाएं भारत के डोमिनियन और प्रशासन उड़ीसा राज्य आदेश 1948 के साथ विलय समझौते के अनुसार इन क्षेत्रों में वैध कानून नहीं थीं, जो मौजूदा कानून है। इसके अलावा हम यहां यह उल्लेख करना चाहेंगे कि ये क्षेत्र उड़ीसा प्रांत द्वारा प्रशासन के लिए विस्तारित किए गए थे और ओरिसस का हिस्सा नहीं थे।

वह दिनांक 11.01.2006 को तत्कालीन आर.डी.सी. (एनडी), संबलपुर सरकार की ओर से श्री अशोक दलवई आईएएस। उड़ीसा सरकार ने आरएसपी और एसई रेलवे अधिकारियों की उपस्थिति में राउरकेला स्थानीय विस्थापित एसोसिएशन और आंचलिक सुरक्षा समिति, बोंडामुंडा के प्रतिनिधि के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और पैरा 5 में निर्दिष्ट किया कि अप्रयुक्त / अधिशेष भूमि को मूल कानूनी उत्तराधिकारियों भूमि धारकों को वापस कर दिया जाएगा। अभी तक शुरू नहीं किया गया है।
इस संबंध में माननीय एनसीएसटी नई दिल्ली ने भी कई रिपोर्ट और सिफारिशें दी हैं। प्रभावित जनजातियों की सुरक्षा के लिए 05-07-2018 और 17-12-2019, लेकिन उक्त रिपोर्ट और सिफारिशों के कार्यान्वयन और अनुपालन के लिए इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

यहां यह उल्लेख करना उचित है कि उक्त मामला संसद और रेल मंत्रालय में पेश किया गया था, श्री अश्विनी वैष्णव ने जटिल और अधिग्रहण प्रक्रिया के बारे में स्वीकार किया था, लेकिन माननीय द्वारा पूछे गए सवाल पर भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। उठने पर सुंदरगढ़ संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री जुएल ओरांव और एस. ई. रेलवे प्राधिकारी को धन्यवाद

दिनांक 02-02-2022

उपरोक्त तथ्यों के कारण, कानून व्यवस्था की स्थिति, रेलवे कमांडो को हथियार प्रदान करके इन विवादित भूमि पर जानबूझकर परियोजनाओं का निर्माण कर रही है, साथ ही प्रभावित समुदाय के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं और शांति श्रृंखला टूट गई है और स्थिति बद से बदतर हो गई है।

मांगे

अत: प्रभावित समुदाय आपके अध्यक्ष से मांग करता है कि विस्थापितों की भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान होने तक उक्त सभी परियोजनाओं को तत्काल प्रभाव से बंद करने तथा प्रावधानों के अनुसार प्रभावित जनजातियों के हितों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने तथा निर्देश देने की मांग की है। भारतीय संविधान के अनुसार ऐसा न करने पर भविष्य में कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने पर आप जिम्मेदार होंगे।