टमाटर पर राजनीति क्यों
हरहर शंभु कुमार चौधरी (मुख्य संपादक)
हमारे देश में यह एक नियम बन गया है कि कभी भी किसी चीज की किमत बढी़ तो आम जनता हो या राजनैतिक गलियारा सभी वर्तमान सरकार को घेरने लगते है, उनकी आलोचना करने लगते है।
अब तक बढ़ी हुई कीमत को लेकर सबसे ज्यादा आलोचना हुई तो वह है पेट्रोल,रसोई गैस और टमाटर पर ।
खाद्ध पदार्थ में टमाटर का मुद्दा सबसे ज्यादा उछाला जाता है।पर क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि टमाटर को ही निशाना क्यों बनाया जाता है जबकि यह साधारण सी बात है कि बरसात के मौसम में हर साल टमाटर के साथ अन्य शब्जियो की भी कीमतें बढ़ जाती है, इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बरसात के मौसम में स्थानीय स्तर पर शब्जीयो का उत्पादन या तो कम हो जाता है या बिल्कुल ही बंद हो जाती है। सभी खेतो में धान की रोपाई की जाती है। ऐसे में बाजार में शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज)में रखे या अन्य प्रदेशो से निर्यात किए जाने वाले शब्जीयो की तादाद माँग के अनुसार काफी कम होती है। माल ढुलाई का खर्चा, और मजदूर की दिहाड़ी में भी काफी खर्च आता है उसपर कभी कभी ऐसा भी होता है कि दूर से आने के कारण या समय पर ना बिकने के कारण काफी शब्जीयाँ खराब हो जाती है जिससे व्यापारी को नुकसान से बचने के लिए मजबूरी बस कीमतें बढानी पड़ती है।
पर हमेशा टमाटर ही निशाने पर क्यों होता है, शायद इसलिए क्योंकि यह एक गरीब के लिए भी उसकी रसोई का अहम हिस्सा होता है।
जबकि इस वक्त सहजन की कीमत भी ₹100 के आसपास हो गई है,इसी तरह अदरक, प्याज, परवल की किमतो में भी कई गुणा बढ़ोत्तरी हुई है।





