चिलिका झील में 11 लाख पक्षियों का आगमन

चिलिका झील में 11 लाख पक्षियों का आगमन

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

भुवनेश्वर: ओडिशा की चिलिका झील में किए गए मध्य-शीतकालीन पक्षी गणना के दौरान 196 प्रजातियों के कुल 11.32 लाख से अधिक पक्षियों की गणना की गई है।  एशिया की एकमात्र खारे पानी की झील चिलिका में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पंखधारी मेहमानों की संख्या में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है।
रविवार (18 जनवरी)  को सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा पक्षियों की संख्या का सर्वेक्षण किया गया।
इस संपन्न हुई गणना के दौरान झील में दो नई पक्षी प्रजातियों की भी पहचान की गई। अधिकारियों के अनुसार, नई प्रजातियां प्लेन मार्टिन और बंगाल बुश लार्क हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन पी. के. झा ने बताया कि इस वर्ष पक्षियों की संख्या 11,32,200 दर्ज की गई, जबकि 2025 में यह संख्या 11,27,228 थी। इस प्रकार, इस वर्ष कुल 4,972 पक्षियों की वृद्धि हुई है।
विशेष रूप से, चिलिका आर्द्रभूमि के अंतर्गत स्थित नलाबाना पक्षी अभयारण्य में पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां 2025 में 92 प्रजातियों के 3,43,226 पक्षी थे, जो 2026 में बढ़कर 106 प्रजातियों के 3,97,587 हो गए हैं।
इसी तरह, चिलिका झील में प्रवासी पक्षियों की संख्या भी 2025 में 10,87,227 से बढ़कर 2026 में 11,10,257 हो गई है। 
आगंतुक पक्षियों में सबसे अधिक संख्या नॉर्दर्न पिंटेल की रही, जिनकी गिनती 2,18,993 दर्ज की गई। इसके बाद यूरेशियन विजन (1,53,318) और गैडवाल (1,43,127) का स्थान रहा।

राज्य के सभी 51 वन प्रभागों में विभिन्न जल निकायों पर वार्षिक जलपक्षी गणना की गई। इसमें चिलिका, भितरकनिका, हीराकुंड और अंसूपा जैसे प्रमुख आर्द्रभूमि क्षेत्र शामिल हैं। 
इस व्यापक गणना अभियान में वन विभाग के कर्मचारियों के अलावा जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI), बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) और ओडिशा जैव विविधता बोर्ड के वैज्ञानिकों ने भी भाग लिया। इसके साथ ही वरिष्ठ पक्षी विशेषज्ञों, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के प्रतिनिधियों, वना सुरक्षा समितियों के सदस्यों, मीडिया प्रतिनिधियों, विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं, छात्रों तथा जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी रही।