गोपाबंधु पुस्तकालय में उत्कल दिवस समारोह और चित्रकला प्रदर्शनी
राउरकेला के अग्रणी साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थान गोपाबंधु पुस्तकालय के तत्वावधान में 91वें उत्कल दिवस के उपलक्ष्य में 'गायत्री आर्ट एंड क्राफ्ट' के सहयोग से पुस्तकालय परिसर में एक चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। सुबह पुस्तकालय के सामने स्थापित गोपाबंधु दास की प्रतिमा पर अध्यक्ष नवघन साहू के नेतृत्व में सदस्यों ने माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की, जिसके बाद छेंड कॉलोनी में स्थापित अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण किया गया। राउरकेला के सभी संस्थानों को मिलाकर प्रशासन द्वारा गठित राष्ट्रीय दिवस समारोह समिति के तत्वावधान में मधुसूदन मार्ग पर स्थापित मधुसूदन दास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम में पुस्तकालय की ओर से कोषाध्यक्ष लक्ष्मण नाथ दास ने प्रतिनिधित्व किया।
सुबह 10 बजे 'गायत्री आर्ट एंड क्राफ्ट' के सहयोग से आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी का राउरकेला के माननीय विधायक ने उद्घाटन किया और उपस्थित चित्रकारों को संबोधित कर उन्हें प्रोत्साहित किया। साथ ही, उन्होंने इसकी अध्यक्षा शक्तिप्रदा जेना के इस महान प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। यहाँ उल्लेखनीय है कि चित्रकला प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए आयोजित प्रतियोगिता में शहर के विभिन्न विद्यालयों से रिकॉर्ड 230 प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया था।
शाम को नवघन साहू की अध्यक्षता में आयोजित एक आम सभा में मुख्य अतिथि के रूप में जाजपुर जिले के वरुणेई महाविद्यालय के ओडिया विभाग के प्रमुख प्राध्यापक सुब्रत कुमार दास, सम्मानित अतिथि के रूप में प्रख्यात चित्रकार गोकुलानंद दाश और रिनु प्रधान के साथ मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद् एवं प्रधानाध्यापिका सुस्मिता महापात्र ने शामिल होकर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। चिन्मय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की शिक्षिका निरुपमा पाणि के निर्देशन में छात्राओं ने संध्या मंत्र पाठ के साथ 'वंदे उत्कल जननी' गीत प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि प्राध्यापक दास ने स्वतंत्र उत्कल प्रदेश के गठन की पृष्ठभूमि पर विस्तृत चर्चा की और उन महान सपूतों के निरंतर एवं अथक प्रयासों का स्मरण कराया, जिनके कारण ओडिशा को भारत के पहले भाषाई राज्य के रूप में मान्यता मिली। मुख्य वक्ता श्रीमती महापात्र ने अपने भाषण में ओडिशा की विरासत, कला, संस्कृति, साहित्य और परंपरा के बारे में विस्तार से चर्चा की तथा इसके वर्तमान पतन पर खेद व्यक्त करते हुए इसके पुनर्जागरण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
अध्यक्ष के स्वागत भाषण के बाद उपाध्यक्ष गिरिजा शंकर गोस्वामी ने अतिथियों का परिचय दिया। कोषाध्यक्ष लक्ष्मण नाथ दास ने मंच का संचालन किया, जबकि पुस्तकालय सचिव विश्वनाथ जेना ने धन्यवाद ज्ञापन किया। चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेकर सफलता प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को अतिथियों ने प्रमाण पत्र व पदक प्रदान कर पुरस्कृत किया।
इस पूरे कार्यक्रम में चिन्मयी पुरोहित, शक्तिप्रदा जेना, हरिहर नायक, सूर्यमणि पंडा, गगन बिहारी जेना, देवराज गौड़ और पाउलुस लाकड़ा आदि ने सहयोग किया। वहीं इस अवसर पर शर्मिष्ठा कबि शतपथी, जगबंधु जेना, डॉ. शक्ति प्रसाद सामंतराय, प्रताप चंद्र महंती, सुवास चंद्र महापात्र, उमेश चंद्र जेना, डॉक्टर गोकुलानंद साहू, सबिता साहू, नृसिंह चरण विश्वाल, गोपाल प्रसाद जेना, ज्ञानेन्द्र कुमार राय, आदिकंद नायक, रमाकांत षडंगी, अशोक कुमार शुक्ल, त्रिलोचन मिश्र, नारायण चंद्र जेना, अजय कुमार प्रधान, भजहरि बेहरा, नगेन सामंतराय, मधुसूदन बल, स्नेहलता पटनायक, रवीन्द्र कुमार दास, हृषीकेश बड़ियार सिंह, हरिश्चंद्र भूमिरे, प्रभाती गोस्वामी, भीमसेन साहू, नरेन्द्र महंती, दीनबंधु दास, मुरारि प्रधान, गुरु चरण पटनायक, रबिनारायण सिंह, नलिनी कुमार पटनायक, उदय कुमार साहू, विश्वनाथ साहू, नरेन्द्र महंती, हृषीकेश नायक, विजय कुमार परिड़ा, दिलीप कुमार पाणिग्राही, दिवाकर पाणिग्राही, गजेन्द्र साहानी और सरोज कुमार स्वाईं सहित सैकड़ों साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी तथा बुद्धिजीवी उपस्थित थे।





