एनआईटी राउरकेला में उत्कल दिवस 2026 का भव्य आयोजन
एनआईटी राउरकेला में 1 अप्रैल 2026 को राज्य के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में बी.बी. ऑडिटोरियम में सायं 5:30 बजे से भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के उत्कल दिवस समारोह समिति 2026 द्वारा, छात्र गतिविधि क्लब के अंतर्गत ओड़िया साहित्य समाज (OSS) के छात्रों के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान जगन्नाथ को पुष्पांजलि अर्पित कर तथा वर्ष 1936 में ओडिशा को एक प्रांत के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात ‘बंदे उत्कल जननी’ राज्य गीत की प्रस्तुति हार्टबीट्स स्टूडेंट क्लब के विद्यार्थियों द्वारा दी गई। संस्थान की डिप्टी-रजिस्ट्रार डॉ. स्वागातिका साहू (सह-संयोजक, उत्कल दिवस समारोह समिति) ने सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के तौर पर राउरकेला कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रबीन्द्र कुमार जेना उपस्थित रहे और अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, "उत्कल दिवस के इस गौरवपूर्ण अवसर पर हम 1936 में ओडिशा के ऐतिहासिक गठन को नमन करते हैं और उन महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने हमारी भाषा और पहचान को संरक्षित रखा। आज ओडिशा स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में सुधार के साथ प्रगति के एक महत्वपूर्ण चरण पर खड़ा है। आइए, हम अपनी समृद्ध विरासत और विशिष्ट संस्कृति से प्रेरणा लें तथा सतत और समावेशी विकास के लिए मिलकर कार्य करें, जो हर गांव और समुदाय तक पहुँचे। हमारे संस्थान और युवा नवाचार, ज्ञान और मजबूत नैतिक मूल्यों के साथ नेतृत्व करें। मैं युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वे अवसरों के सृजनकर्ता बनें और आत्मनिर्भर, प्रगतिशील ओडिशा और भारत के सशक्त स्तंभ बनें।"
अपनी शुभकामनाएँ देते हुए, प्रो. के. उमामहेश्वर राव, निदेशक, एनआईटी राउरकेला ने कहा, “हमें इतिहास का सम्मान करना चाहिए और उन संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिन्हें हम मिलकर साकार कर सकते हैं। एक विकसित और समृद्ध ओडिशा का निर्माण आपके दृष्टिकोण, जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयासों से होगा। आज हम जो भी कदम उठाते हैं, वही इस राज्य के भविष्य को आकार देते हैं। आइए, हम संकल्प के साथ आगे बढ़ें और हर संभव तरीके से ओडिशा के विकास, नवाचार और उत्थान में योगदान दें। आप सभी को गर्वपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण उत्कल दिवस की शुभकामनाएँ।”
इस अवसर पर डीन (छात्र कल्याण) प्रो. निरंजन पंडा, रजिस्ट्रार प्रो. रोहन धीमान तथा छात्र गतिविधि केंद्र के अध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार पंडा ने भी अपनी शुभकामनाएं दीं।श्रोताओं को संबोधित करते हुए कार्यक्रम समन्वयक प्रो. आर.के. बिस्वाल ने कहा, “उत्कल, जो उत्कृष्ट कला की भूमि है और भाषा के आधार पर गठित पहला राज्य है, पिछले 90 वर्षों में एक प्रगतिशील राज्य के रूप में उभरा है। आने वाले 10 वर्षों में उत्कल अर्थात वर्तमान ओडिशा शिक्षा, संस्कृति, कौशल, अर्थव्यवस्था तथा समग्र विकास के मानकों में अग्रणी बनने जा रहा है। राज्य के युवा अपने समर्पण, कड़ी मेहनत और मातृभूमि के प्रति प्रेम के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
कार्यक्रम के दौरान ओड़िया साहित्य समाज क्लब द्वारा प्रकाशित ओड़िया पत्रिका ‘सम्पूर्ण’ के चौथे संस्करण का भी विमोचन किया गया।
उत्कल दिवस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुति भी हुई, जिसमें राज्य की समृद्ध परंपरा और कला का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अनुष्का दास द्वारा ‘मंगलाचरण’ से हुई। इसके पश्चात खोरधा जिले के कलाकारों द्वारा ‘पाइका अखाड़ा’ की प्रस्तुति दी गई। एम.टेक छात्रा मिस रश्मि जेना ने ‘आमा गांव कु’ (अर्ध-शास्त्रीय ओड़िया लोक नृत्य) प्रस्तुत किया। इसके अलावा ‘नृत्युंजय’ (विद्यार्थी क्लब) द्वारा संबलपुरी नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई।
गत एक सप्ताह के दौरान उत्कल दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें पेंटिंग, कलिंग क्विज, ओड़िया सृजनात्मक लेखन, ओड़िया स्पेलिंग बी, चित्रकला, ओड़िया कविता पाठ तथा गणित क्विज शामिल थे। ओड़िया साहित्य समाज क्लब के सौभाग्य बिस्वाल (अध्यक्ष), प्रभुपाद (उपाध्यक्ष) तथा क्लब के अन्य छात्र सदस्यों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान दिया।
कार्यक्रम का समापन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित करने तथा श्री नलिनी निहार नायक (एसएएस अधिकारी, एनआईटी राउरकेला) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन द्वितीय वर्ष की छात्राएं प्रत्याशा सारंगी और अन्वेषा दास ने किया।





