एनआईटी राउरकेला ने विमान लैंडिंग गियर के लिए ज्यादा उन्नत और टिकाऊ मैटेरियल विकसित किया
प्रेस विज्ञप्ति: एनआईटी राउरकेला
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी राउरकेला) के एक शोध समूह ने एक हल्के वज़न वाला ऐसा मैटेरियल विकसित किया है, जिसका उपयोग विमान के लिए ज्यादा मजबूत और टिकाऊ लैंडिंग गियर बनाने में किया जा सकता है। विमान लैंडिंग गियर को विमान के उतरने और जमीन पर स्थानांतरण के दौरान होने वाले घिसाव और दबाव को सहने के लिए अत्यधिक टिकाऊ होना आवश्यक है।आमतौर पर एल्यूमिनियम और उसकी मिश्रधातुओं से बने लैंडिंग गियर विमान का भार सहने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं जिन्हें विमान के लैंडिंग के दौरान रनवे के संपर्क को भी सहना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में यह मैटेरियल जल्दी घिस जाते हैं। हालांकि एल्यूमिनियम हल्का होता है, लेकिन अत्यधिक दबाव में इसका टिकाऊपन एक चुनौती बना रहता है।इस समस्या के समाधान के लिए एनआईटी राउरकेला के मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. सैयद नसीमुल आलम ने अपने शोध दल, डॉ. अर्का घोष, डॉ. आशुतोष दास, डॉ. पंकज श्रीवास्तव, श्री नित्यानंद साहू, श्री पार्थ पटेल, तथा दक्षिण अफ्रीका विश्वविद्यालय (UNISA) के डॉ. वेलाफी मसोमी, के साथ मिलकर एक नवीन नैनोकॉम्पोज़िट मैटेरियल विकसित किया है, जिसका उपयोग विमान लैंडिंग गियर में किया जा सकता है।
नैनोकॉम्पोज़िट ऐसे पदार्थ होते हैं जो नैनो स्तर पर विभिन्न सामग्रियों के मिश्रण से बनते हैं और ये मानव बाल से 100,000 गुना पतले होते हैं।वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए, शोधकर्ताओं ने बेहतर दाब-सहन क्षमता और भार वितरण क्षमता के लिए कार्बन नैनोट्यूब का उपयोग किया। इसे अधिक मज़बूती देने के लिए ग्रेफाइट नैनोप्लेटलेट्स से जोड़ा गया। मिश्रण को तापीय रूप से स्थिर बनाने के लिए हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड का उपयोग किया गया।
एल्यूमिनियम मैट्रिक्स में कणों के समान वितरण के लिए उच्च-आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उपयोग किया गया, जिससे एल्यूमिनियम की मजबूती और कठोरता में सुधार हुआ। इसके बाद मिश्रण को उच्च दाब वाले ऑक्सीजन-रहित वातावरण में गर्म कर दबाया गया, जिससे एक सघन और मजबूत बंधित नैनोकॉम्पोज़िट प्राप्त हुआ, जो एयरोस्पेस उपयोग के लिए उपयुक्त है।विकसित किये गए नैनोकॉम्पोज़िट के बारे मैं बताते हुए प्रो. सैयद नसीमुल आलम ने कहा, “स्पार्क प्लाज़्मा सिंटरिंग (SPS) द्वारा विकसित एल्यूमिनियम-आधारित हाइब्रिड नैनोकॉम्पोज़िट में नैनोफिलर का समान वितरण होता है और यह भार-वहन की समन्वित प्रक्रिया के कारण उत्कृष्ट घिसाव प्रतिरोध प्रदर्शित करता है।”
यह प्रक्रिया त्रि-आयामी सुदृढ़ीकरण नेटवर्क (थ्री डिमेन्शनल रीइन्फोर्सिंग नेटवर्क) बनाती है, जो भार हस्तांतरण और संरचनात्मक स्थिरता को बढ़ाती है। सतह पर बनने वाली एक पतली सुरक्षात्मक परत के कारण घिसाव में उल्लेखनीय कमी देखी गई।यह नैनोकॉम्पोज़िट रक्षा विमानों और मानवरहित हवाई वाहनों में उपयोग के लिए उपयुक्त है, जहां हल्कापन और टिकाऊपन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह संरचनात्मक विश्वसनीयता बढ़ाकर सुरक्षित और कुशल एयरोस्पेस संचालन में योगदान दे सकता है। वर्तमान में उपयोग में आने वाले अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील, टाइटेनियम मिश्रधातु और उच्च-शक्ति एल्यूमिनियम मिश्रधातुओं की तुलना में, यह नैनोकॉम्पोज़िट लगभग 40–60% अधिक लागत-प्रभावी हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि इस मैटेरियल का हल्कापन और घिसाव प्रतिरोध का संयोजन लैंडिंग गियर को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाएगा। कम रखरखाव लागत और बेहतर विश्वसनीयता जैसे लाभों के साथ, यह नैनोकॉम्पोज़िट ऊर्जा-संकटग्रस्त दुनिया में परिवर्तनकारी प्रभाव डाल सकता है।शोध टीम के पास पहले से ही नैनोकंपोजिट विकसित करने के लिए पाउडर के मिश्रण पर एक पेटेंट है और टीम इस नई मैटेरियल के लिए पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया में हैं। अगले चरण में, टीम पाउडर मेटलर्जी तकनीक के माध्यम से इन हाइब्रिड नैनोकॉम्पोज़िट से बड़े आकार के घटक विकसित करने पर काम कर रही है। भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप एनआईटी राउरकेला का यह नवाचार देश को अगली पीढ़ी के एयरोस्पेस मैटेरियल्स के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।





