एनआईटी राउरकेला ने विकसित की स्मार्ट घाव ड्रेसिंग

एनआईटी राउरकेला ने विकसित की स्मार्ट घाव ड्रेसिंग

शतीस शर्मा (उप संपादक) 

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी) के शोधकर्ताओं ने घावों की उन्नत देखभाल के लिए एक स्मार्ट ड्रेसिंग विकसित की है, जो संक्रमण के खतरे को कम करने, ड्रेसिंग बदलते समय होने वाले दर्द को घटाने तथा घाव को तेजी से भरने में मददगार होगी। संस्थान का दावा है कि व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन होने पर इसकी अनुमानित कीमत 50 से 60 रुपये होगी।
यह स्मार्ट ड्रेसिंग एनआईटी राउरकेला के जैव प्रौद्योगिकी एवं चिकित्सा अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर प्रो. प्रसून कुमार के नेतृत्व में विकसित की गई है। यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी होगी, जिन्हें बार-बार ड्रेसिंग बदलनी पड़ती है और हर बार दर्द व असुविधा का सामना करना पड़ता है।


शोधकर्ताओं ने पारंपरिक कॉटन गॉज़ की कमियों को दूर करने के लिए चिटोसन-लेपित कॉटन गॉज़ और इलेक्ट्रोस्पन नैनोफाइबर परत को एकीकृत किया है। नैनोफाइबर परत में हल्दी से प्राप्त करक्यूमिन का उपयोग किया गया है, जो प्राकृतिक जीवाणुरोधी गुणों से भरपूर है। यह परत घाव और गॉज़ के बीच सुरक्षा परत का कार्य करती है, जिससे ड्रेसिंग घाव से कम चिपकती है और हटाते समय नई बनी ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचता। करक्यूमिन युक्त नैनोफाइबर धीरे-धीरे दवा का नियंत्रित उत्सर्जन करते हैं, जिससे लंबे समय तक संक्रमण-रोधी सुरक्षा मिलती है। साथ ही यह कोशिकाओं की वृद्धि और ऊतकों के पुनर्निर्माण को भी बढ़ावा देता है, जिससे घाव तेजी से भरता है और बार-बार ड्रेसिंग बदलने की आवश्यकता कम हो सकती है।
प्रो. प्रसून कुमार ने बताया कि प्रयोगशाला परीक्षणों में यह स्मार्ट ड्रेसिंग सामान्य कॉटन गॉज़ की तुलना में घाव से काफी कम चिपकी तथा बेहतर जीवाणुरोधी सुरक्षा प्रदान करने में सफल रही।
इस शोध के निष्कर्ष "एमरजेंट मैटीरियल्स" ( Emergent Materials) में प्रकाशित हुए हैं। शोध दल में प्रो. देवेंद्र वर्मा, प्रो. ईरु बनोथ तथा शोधार्थी स्वागातिका बारिक, रिका रानी प्रधान, शिखा त्रिपाठी और समद्रिता रॉय शामिल हैं। शोध को एएनआरएफ-पीएआरई तथा एसईआरबी-एसआरजी अनुदान का सहयोग मिला है। अब शोध दल इस तकनीक का पेटेंट कराने और क्लीनिकल परीक्षणों के लिए उद्योग जगत के साथ साझेदारी की दिशा में काम करेगा।