आज है लोक नायक जय प्रकाश नारायण का जन्म दिन

आज है लोक नायक जय प्रकाश नारायण का जन्म दिन

जय प्रकाश नारायण: (लोकनायक जेपी) भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और राजनेता थे। उन्हें मुख्य रूप से 1970 के दशक में इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ चलाए गए 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन और आपातकाल के विरोध के लिए जाना जाता है। जय प्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा गाँव में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम हरसू दयाल और माता का नाम फूल रानी था।  उनकी शुरुआती शिक्षा गाँव और पटना में हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने पटना कॉलेज में दाखिला लिया।

 महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और स्वतंत्रता संग्राम के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने असहयोग आंदोलन के दौरान सरकारी कॉलेज छोड़ दिया था।
 आगे की उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका गए, जहाँ उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले, आयोवा और विस्कॉन्सिन-मैडिसन जैसे संस्थानों में समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। अमेरिका में अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने कारखानों और होटलों में छोटे-मोटे काम भी किए।

 1929 में अमेरिका से लौटने के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। 1934 में उन्होंने आचार्य नरेंद्र देव, राम मनोहर लोहिया और मिनु मसानी के साथ मिलकर कांग्रेस के भीतर ही कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) की स्थापना की, जो एक वामपंथी दल था।
भारत छोड़ो आंदोलन (1942): महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान पर उन्होंने और उनके साथियों (जैसे राम मनोहर लोहिया और अरुणा आसफ अली) ने भूमिगत रहकर अंग्रेजों के खिलाफ उग्र आंदोलन चलाया। उन्हें अंग्रेजों द्वारा हजारीबाग सेंट्रल जेल में कैद किया गया था, जहाँ से वे दीवार फाँदकर फरार हो गए थे और नेपाल की तराई में 'आज़ाद दस्ता' का गठन किया था। बाद में उन्हें फिर गिरफ्तार किया गया। स्वतंत्रता के बाद का राजनीतिक सफर और सर्वोदय आंदोलन
 आज़ादी के शुरुआती वर्षों में उन्होंने नेहरू के साथ मिलकर काम करने से इनकार कर दिया क्योंकि वे समाजवादी दिशा चाहते थे। 1948 में उन्होंने समाजवादी दल को कांग्रेस से पूरी तरह अलग कर लिया।

सर्वोदय आंदोलन: 1954 में जय प्रकाश नारायण ने दलीय राजनीति और सत्ता की लालसा को त्यागकर विनोबा भावे के 
भूदान आंदोलन और 'सर्वोदय आंदोलन' में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। उन्होंने चंबल के खूंखार डाकुओं को समाज की मुख्यधारा में लाने और उनके आत्मसमर्पण में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

छात्र आंदोलन और बिहार आन्दोलन: 1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में देश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार चरम पर था। 1974 में छात्रों के नेतृत्व में बिहार में एक बड़ा आंदोलन शुरू हुआ, जिसका नेतृत्व करने का अनुरोध जेपी ने इस शर्त पर स्वीकार किया कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा।  जेपी ने इस आंदोलन को केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और नैतिक बदलाव का रूप दिया, जिसे  संपूर्ण क्रांति' कहा गया।आपातकाल और जेल: 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया। इसके जवाब में जेपी ने इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग की और पुलिस व सेना से भी असंवैधानिक आदेश न मानने का आह्वान किया। इसके चलते 25 जून 1975 को देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा कर दी गई और जेपी सहित देश के तमाम बड़े विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

जनता पार्टी की सरकार: आपातकाल के बाद 1977 के आम चुनावों में जेपी के नेतृत्व में सभी विपक्षी दल एकजुट हुए और 'जनता पार्टी' के बैनर तले चुनाव लड़ा। परिणामस्वरूप, आज़ादी के बाद देश में पहली बार किसी गैर-कांग्रेस सरकार का गठन हुआ।

भारत रत्न: भारतीय राजनीति और समाज सेवा में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें मरणोपरांत वर्ष 1999 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। अन्य प्रमुख पुरस्कारों में उन्हें 1965 में 'रेमन मैग्सेसे पुरस्कार' भी मिला था।

निधन:मधुमेह और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों के चलते 8 अक्टूबर 1979 को पटना में उनका निधन हो गया। जय प्रकाश नारायण को उनकी सादगी, ईमानदारी और देश के प्रति अगाध निष्ठा के कारण आजआया। जनता के नायक (लोकनायक) के रूप में याद किया जाता है।