अल्प बृष्टी ने बढ़ाई किसानो की चिंता

अल्प बृष्टी ने बढ़ाई किसानो की चिंता

रामप्रवेश चौधरी (संपादक) 

श्रावण का महीना खत्म हो रहा है;  बारिश के आसार नहीं, किसानो की चिंता बढी़ भगवान भरोसे या सरकार भरोसे है किसान ?

सुंदरगढ़ जिला में  सावन का महीना खत्म होने के साथ ही बारिश के आसार नहीं दिख रहे हैं।  अब किसान सिर पर हाथ रखे बैठा है।  अन्य वर्षों में इस समय किसान रोपाई और सोहाई का कार्य करते थे, लेकिन इस वर्ष वर्षा न होने से हजारों हेक्टेयर खेत सूख गए हैं।  बारिश के अभाव में बोया गया धान कही खेतो में सूख रहा है, तो कही पूरा सुख कर खराब हो चुका है ।

ऐसा भयावह मंजर सुंदरगढ़ जिले के कुतरा प्रखंड की सभी 16 पंचायतों और राजगांगपुर प्रखंड की 20 पंचायतों में देखने को मिल रहा है.  कुतरा प्रखंड में कुल 20,000 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें से 9779, हेक्टेयर कृषि भूमि इस वर्ष बोई गई थी.  शेष भूमि का उपयोग तेल और दलहन  के लिए किया गया था।  इसी प्रकार राजगांगपुर प्रखंड में जहां 18865 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है, वहीं 10236 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है और शेष भूमि पर तेल एवं दलहन की खेती होती है,वर्षा ऋतु के आरम्भ में अच्छी बारिश होने से  किसान बड़ी उम्मीद के साथ खेती शुरू की।

वही वर्तमान समय में बरसात नहीं होने से किसान अब सर पर हाथ धरे बैठे हैं, इस बात की चिंता सता रही है कि कर्ज कैसे चुकाएं और अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करें।  कुतरा प्रखंड में जून में 66 मिली मीटर और जुलाई में 290 मिमी बारिश हुई.  इसी तरह राजगांगपुर प्रखंड में जून में 66.2 मिमी और जुलाई में 204 मिमी बारिश हुई.  जो धान की खेती के लिए उपयुक्त नहीं है।इस संबंध में हमारे प्रतिनिधि राजगांगपुर प्रखंड कृषि अधिकारी हेमंत कुमार जेना से मिलकर इसकी जानकारी ली,उन्होने  कहा कि यदि एक-दो दिन में बारिश हो जाती है तो किसान कुछ निराई-गुड़ाई कर सकता है, अन्यथा किसान को काफ़ी हद तक नुकसान होगा।

वहीं, संबलपुर जिले के बमरा प्रखंड की 17 पंचायतों की स्थिति भी दयनीय हो गई है.  बारिश नहीं होने से इस प्रखंड के किसानों को परेशानी हो रही है.  वे विभिन्न बैंकों और लोगो से कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, लेकिन इस साल बारिश नहीं होने से किसानों की कमर टूट गई है.  इसमें कोई संदेह नहीं है कि जब वह कर्ज में डूबा होगा और अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए संघर्ष करे और सूखा पड़ जाय, तो उसे बाध्य होकर आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 

वहीं इन किसानो की क्षति को लेकर सरकार की तरफ से अभी तक आकलन  नहीं की गई है।