अब इंजीनियरिंग की पढाई ओड़िया में राष्ट्रपति ने दी हरी झंडी

अब इंजीनियरिंग की पढाई ओड़िया में राष्ट्रपति ने दी हरी झंडी

ओड़िशा राज्य के दौरे में आए भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने अपने ओडिशा दौरे के दौरान शिक्षा को महत्व दिया। उन्होने कहा कि मातृभाषा में पढ़ाने से छात्रों में रचनात्मक सोच और कौशल का विकास होगा। इस अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति ने ओड़िया भाषा में अनुवाद किए गए किताब का विमोचन किया। ओड़िया सहित 10 भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग पुस्तक का अनुवाद किया गया है।  

केन्द्रीय मंत्री धरमेंद्र प्रधान ने कहा कि ओड़िया वासियों और ओड़िया भाषा के लिए मह यादगार दिन है केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रपति को 'राष्ट्रीय शिक्षा दिवस' पर उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होने कवि गंगाधर मेहर की उक्ति "ऊँची होने की आशा हो तो पहले अपनी मातृभाषा को ऊपर उठाओ" ने इसे उचित ठहराया,और कहा कि शिक्षा प्रणाली में भारतीय भावना का संचार करने के लिए मातृभाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के 20 विषयों का ओडि़या भाषा में अनुवाद किया गया है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि मातृभाषा छात्रों में बौद्धिक ज्ञान का विकास करती है।  माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को 'राष्ट्रीय शिक्षा दिवस' के अवसर पर भुवनेश्वर के जयदेव भवन में शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एक विशेष समारोह को संबोधित करते हुए कहा है कि मातृभाषा में शिक्षा से छात्रों में रचनात्मक सोच और कौशल का विकास होगा।

ओडिया इंजीनियरिंग पुस्तक और अन्य पहलों के शुभारंभ के अवसर पर माननीय राष्ट्रपति ने कहा कि ओड़िया एक प्राचीन और समृद्ध भाषा है।  इसकी एक नवीन साहित्यिक परंपरा और एक समृद्ध शब्दावली है।  इसलिए, ओडि़या भाषा में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं होगी।  उन्होंने कहा कि शिक्षा सशक्तिकरण का माध्यम है।  हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे देश में हर बच्चे की हर स्तर पर शिक्षा तक पहुंच हो।  हमें बिना किसी भेदभाव के सभी को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।  भाषा बाधा नहीं होनी चाहिए बल्कि छात्रों को पढ़ाने में सहायक होनी चाहिए।  क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा का परिचय दीर्घकालीन आधार पर एक शिक्षित, जागरूक और सक्रिय समाज बनाने में मदद कर सकता है।

केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि आज का दिन शिक्षित समुदाय और दीक्षित भाषा के लिए यादगार रहेगा।  ऐसे ही एक सारस्वत समारोह में, माननीय राष्ट्रपति, एक उड़िया के रूप में, अखिल भारतीय वैज्ञानिक शिक्षा परिषद (AICTE) और सेंटर फॉर ओड़या स्टडीज एंड रिसर्च (IOSR) के बीच एक संयुक्त उद्यम, उड़िया में इंजीनियरिंग की किताबें, ज्ञान पोर्टल 'ई-' का शुभारंभ किया। भारतीय भाषा और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में कुंभ' भाषाकालकासा (सीएसटीटी) द्वारा विकसित यांत्रिक शब्दावली को लॉन्च करना ओडिशा के लिए सम्मान की बात है।  श्री प्रधान ने 'राष्ट्रीय शिक्षा दिवस' के अवसर पर माननीय राष्ट्रपति को उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।

गौरतलब है कि पिछले साल 18 अक्टूबर को भुवनेश्वर में एआईसीटीई और सेंटर फॉर ऑर्डिया स्टडीज एंड रिसर्च (आईओएसआर) के बीच उड़िया भाषा में इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।

कार्यक्रम में शामिल होने से पहले, केंद्रीय मंत्री ने माननीय राष्ट्रपति के साथ भुवनेश्वर में तपोबन हाई स्कूल, कैपिटल गर्ल्स हाई स्कूल, जहां से राष्ट्रपति ने शिक्षा ग्रहण की थी, कुंतला कुमारी सावत जनजाति छात्रावास का दौरा किया।